वाल्मीकि रामायण 5.2.25
दंष्ट्रिभिर्बहुभिः शूरैः शूलपट्टिसपाणिभिः ।रक्षितां राक्षसैर्घोरैर्गुहामाशीविषैरिव॥
daṃṣṭribhirbahubhiḥ śūraiḥ śūlapaṭṭisapāṇibhiḥ |rakṣitāṃ rākṣasairghorairguhāmāśīviṣairiva ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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