वाल्मीकि रामायण 5.20.23
सीताया वचनं श्रुत्वा रावणो राक्षसाधिपः ।विवृत्य नयने क्रूरे जानकीमन्ववैक्षत॥
sītāyā vacanaṃ śrutvā rāvaṇo rākṣasādhipaḥ |vivṛtya nayane krūre jānakīmanvavaikṣata ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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