वाल्मीकि रामायण 5.24.12
ख्यातः प्राज्ञः कृतज्ञश्च सानुक्रोशश्च राघवः ।सद्वृत्तो निरनुक्रोशः शङ्के मद्भाग्यसङ्क्षयात्॥
khyātaḥ prājñaḥ kṛtajñaśca sānukrośaśca rāghavaḥ |sadvṛtto niranukrośaḥ śaṅke madbhāgyasaṅkṣayāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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