वाल्मीकि रामायण 5.24.14
निरुद्धा रावणेनाहमल्पवीर्येण रक्षसा ।समर्थः खलु मे भर्ता रावणं हन्तुमाहवे॥
niruddhā rāvaṇenāhamalpavīryeṇa rakṣasā |samarthaḥ khalu me bhartā rāvaṇaṃ hantumāhave ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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