वाल्मीकि रामायण 5.24.42
किं नु मे न गुणाः के चित्किं वा भाग्य क्षयो हि मे ।याहं सीता वरार्हेण हीना रामेण भामिनी॥
kiṃ nu me na guṇāḥ ke citkiṃ vā bhāgya kṣayo hi me |yāhaṃ sītā varārheṇa hīnā rāmeṇa bhāminī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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