वाल्मीकि रामायण 5.25.15
भर्तारं तमपश्यन्ती राक्षसीवशमागता ।सीदामि खलु शोकेन कूलं तोयहतं यथा॥
bhartāraṃ tamapaśyantī rākṣasīvaśamāgatā |sīdāmi khalu śokena kūlaṃ toyahataṃ yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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