वाल्मीकि रामायण 5.25.2
एवमुक्ता तु वैदेही राक्षसीभिर्मनस्विनी ।उवाच परमत्रस्ता बाष्पगद्गदया गिरा॥
evamuktā tu vaidehī rākṣasībhirmanasvinī |uvāca paramatrastā bāṣpagadgadayā girā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें