वाल्मीकि रामायण 5.27.28
कण्ठे बद्ध्वा दशग्रीवं प्रमदा रक्तवासिना ।काली कर्दमलिप्ताङ्गी दिशं याम्यां प्रकर्षति॥
kaṇṭhe baddhvā daśagrīvaṃ pramadā raktavāsinā |kālī kardamaliptāṅgī diśaṃ yāmyāṃ prakarṣati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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