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वाल्मीकि रामायण 5.27.31
एकस्तत्र मया दृष्टः श्वेतच्छत्रो विभीषणः॥
ekastatra mayā dṛṣṭaḥ śvetacchatro vibhīṣaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंएकस्तत्र मया दृष्टः श्वेतच्छत्रो विभीषणः॥
ekastatra mayā dṛṣṭaḥ śvetacchatro vibhīṣaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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