वाल्मीकि रामायण 5.27.39
अपगच्छत नश्यध्वं सीतामाप स राघवः ।घातयेत् परमामर्षी सर्वैः सार्धं हि राक्षसैः॥
apagacchata naśyadhvaṃ sītāmāpa sa rāghavaḥ |ghātayet paramāmarṣī sarvaiḥ sārdhaṃ hi rākṣasaiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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