वाल्मीकि रामायण 5.30.20
सेयमालोक्य मे रूपं जानकी भाषितं तथा ।रक्षोभिस्त्रासिता पूर्वं भूयस्त्रासं गमिष्यति॥
seyamālokya me rūpaṃ jānakī bhāṣitaṃ tathā |rakṣobhistrāsitā pūrvaṃ bhūyastrāsaṃ gamiṣyati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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