वाल्मीकि रामायण 5.30.32
विशस्ते वा गृहीते वा रक्षोभिर्मयि संयुगे ।नान्यं पश्यामि रामस्य साहाय्यं कार्यसाधने॥
viśaste vā gṛhīte vā rakṣobhirmayi saṃyuge |nānyaṃ paśyāmi rāmasya sāhāyyaṃ kāryasādhane ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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