वाल्मीकि रामायण 5.30.8
यद्यप्यहमिमां देवीं शोकोपहतचेतनाम् ।अनाश्वास्य गमिष्यामि दोषवद् गमनं भवेत्॥
yadyapyahamimāṃ devīṃ śokopahatacetanām |anāśvāsya gamiṣyāmi doṣavad gamanaṃ bhavet ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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