वाल्मीकि रामायण 5.31.15
यथारूपां यथावर्णां यथालक्ष्मीं च निश्चिताम् ।अश्रौषं राघवस्याहं सेयमासादिता मया॥
yathārūpāṃ yathāvarṇāṃ yathālakṣmīṃ ca niścitām |aśrauṣaṃ rāghavasyāhaṃ seyamāsāditā mayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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