वाल्मीकि रामायण 5.33.11
रोदनादतिनिःश्वासाद्भूतमिसंस्पर्शनादपि ।न त्वां देवीमहं मन्ये राज्ञः संज्ञावधारणात्॥
rodanādatiniḥśvāsādbhūtamisaṃsparśanādapi |na tvāṃ devīmahaṃ manye rājñaḥ saṃjñāvadhāraṇāt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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