वाल्मीकि रामायण 5.33.15
सा तस्य वचनं श्रुत्वा रामकीर्तनहर्षिता ।उवाच वाक्यं वैदेही हनुमन्तं द्रुमाश्रितम्॥
sā tasya vacanaṃ śrutvā rāmakīrtanaharṣitā |uvāca vākyaṃ vaidehī hanumantaṃ drumāśritam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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