वाल्मीकि रामायण 5.33.18
समा द्वादश तत्राहं राघवस्य निवेशने ।भुञ्जाना मानुषान् भोगान् सर्वकामसमृद्धिनी॥
samā dvādaśa tatrāhaṃ rāghavasya niveśane |bhuñjānā mānuṣān bhogān sarvakāmasamṛddhinī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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