वाल्मीकि रामायण 5.33.25
स पितुर्वचनं श्रीमानभिषेकात् परं प्रियम् ।मनसा पूर्वमासाद्य वाचा प्रतिगृहीतवान्॥
sa piturvacanaṃ śrīmānabhiṣekāt paraṃ priyam |manasā pūrvamāsādya vācā pratigṛhītavān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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