वाल्मीकि रामायण 5.33.31
वसतो दणऽडकारण्ये तस्याहममितौजसः ।रक्षसा ऽपहृता भार्या रावणेन दुरात्मना॥
vasato daṇa'ḍakāraṇye tasyāhamamitaujasaḥ |rakṣasā 'pahṛtā bhāryā rāvaṇena durātmanā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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