वाल्मीकि रामायण 5.34.1
तस्यास्तद्वचनं श्रुत्वा हनुमान् हरियूथपः ।दुःखाद्दुःखाभिभूतायाः सान्त्वमुत्तरमब्रवीत्॥
tasyāstadvacanaṃ śrutvā hanumān hariyūthapaḥ |duḥkhādduḥkhābhibhūtāyāḥ sāntvamuttaramabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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