वाल्मीकि रामायण 5.34.7
तया समागते तस्मिन् प्रीतिरुत्पादिता ऽद्भुता ।परस्परेण चालापं विश्वस्तौ तौ प्रचक्रतुः॥
tayā samāgate tasmin prītirutpāditā 'dbhutā |paraspareṇa cālāpaṃ viśvastau tau pracakratuḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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