वाल्मीकि रामायण 5.36.10
अर्हसे च कपिश्रेष्ठ मया समभिभाषितुम् ।यद्यपि प्रेषितस्तेन रामेण विदितात्मना॥
arhase ca kapiśreṣṭha mayā samabhibhāṣitum |yadyapi preṣitastena rāmeṇa viditātmanā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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