वाल्मीकि रामायण 5.36.24
कच्चिदक्षौहिणीं भीमां भरतो भ्रातृवत्सलः ।ध्वजिनीं मन्त्रिभिर्गुप्तां प्रेषयिष्यति मत्कृते॥
kaccidakṣauhiṇīṃ bhīmāṃ bharato bhrātṛvatsalaḥ |dhvajinīṃ mantribhirguptāṃ preṣayiṣyati matkṛte ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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