वाल्मीकि रामायण 5.36.32
सीताया वचनं श्रुत्वा मारुतिर्भीमविक्रमः ।शिरस्यञ्जलिमाधाय वाक्यमुत्तरमब्रवीत्॥
sītāyā vacanaṃ śrutvā mārutirbhīmavikramaḥ |śirasyañjalimādhāya vākyamuttaramabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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