वाल्मीकि रामायण 5.36.39
यथा सुनयनं वल्गु बिम्बोष्ठं चारुकुण्डलम् ।मुखं द्रक्ष्यसि रामस्य पूर्णचन्द्रमिवोदितम्॥
yathā sunayanaṃ valgu bimboṣṭhaṃ cārukuṇḍalam |mukhaṃ drakṣyasi rāmasya pūrṇacandramivoditam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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