वाल्मीकि रामायण 5.36.43
नित्यं ध्यानपरो रामो नित्यं शोकपरायणः ।नान्यच्चिन्तयते किञ्चित् स तु कामवशं गतः॥
nityaṃ dhyānaparo rāmo nityaṃ śokaparāyaṇaḥ |nānyaccintayate kiñcit sa tu kāmavaśaṃ gataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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