वाल्मीकि रामायण 5.37.1
सीता तद्वचनं श्रुत्वा पूर्णचन्द्रनिभानना ।हनूमन्तमुवाचेदं धर्मार्थसहितं वचः॥
sītā tadvacanaṃ śrutvā pūrṇacandranibhānanā |hanūmantamuvācedaṃ dharmārthasahitaṃ vacaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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