वाल्मीकि रामायण 5.37.20
त्वां तु पृष्ठगतां कृत्वा सन्तरिष्यामि सागरम् ।शक्तिरस्ति हि मे वोढुं लङ्कामपि सरावणाम्॥
tvāṃ tu pṛṣṭhagatāṃ kṛtvā santariṣyāmi sāgaram |śaktirasti hi me voḍhuṃ laṅkāmapi sarāvaṇām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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