वाल्मीकि रामायण 5.37.39
तव सत्त्वं बलं चैव विजानामि महाकपे ।वायोरिव गतिं चापि तेजश्चाग्नेरिवाद्भुतम्॥
tava sattvaṃ balaṃ caiva vijānāmi mahākape |vāyoriva gatiṃ cāpi tejaścāgnerivādbhutam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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