वाल्मीकि रामायण 5.37.49
युद्ध्यमानस्य रक्षोभिस्तव तैः क्रूरकर्मभिः ।प्रपतेयं हि ते पृष्ठाद् भयार्ता कपिसत्तम॥
yuddhyamānasya rakṣobhistava taiḥ krūrakarmabhiḥ |prapateyaṃ hi te pṛṣṭhād bhayārtā kapisattama ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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