वाल्मीकि रामायण 5.37.5
शोकस्यास्य कदा पारं राघवो ऽधिगमिष्यति ।प्लवमानः परिश्रान्तो हतनौः सागरे यथा॥
śokasyāsya kadā pāraṃ rāghavo 'dhigamiṣyati |plavamānaḥ pariśrānto hatanauḥ sāgare yathā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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