वाल्मीकि रामायण 5.38.24
वायसेन ततस्तेन बलवत्क्लिश्यमानया ।स मया बोधितः श्रीमान् सुखसुप्तः परन्तपः॥
vāyasena tatastena balavatkliśyamānayā |sa mayā bodhitaḥ śrīmān sukhasuptaḥ parantapaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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