वाल्मीकि रामायण 5.38.34
स तं निपतितं भूमौ शरण्यः शरणागतम् ।वधार्हमपि काकुत्स्थः कृपया पर्यपालयत्॥
sa taṃ nipatitaṃ bhūmau śaraṇyaḥ śaraṇāgatam |vadhārhamapi kākutsthaḥ kṛpayā paryapālayat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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