वाल्मीकि रामायण 5.38.39
मत्कृते काकमात्रे तु ब्रह्मास्त्रं समुदीरितम् ।कर्माद्यो मां हरत्त्वत्तः क्षमसे तं महीपते॥
matkṛte kākamātre tu brahmāstraṃ samudīritam |karmādyo māṃ harattvattaḥ kṣamase taṃ mahīpate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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