वाल्मीकि रामायण 5.38.43
एवमस्त्रविदां श्रेष्ठः सत्यवान् बलवानपि ।किमर्थमस्त्रं रक्षस्सु न योजयति राघवः॥
evamastravidāṃ śreṣṭhaḥ satyavān balavānapi |kimarthamastraṃ rakṣassu na yojayati rāghavaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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