वाल्मीकि रामायण 5.38.50
त्वच्छोकविमुखो रामो देवि सत्येन मे शपे ।रामे दुःखाभिपन्ने च लक्ष्मणः परितप्यते॥
tvacchokavimukho rāmo devi satyena me śape |rāme duḥkhābhipanne ca lakṣmaṇaḥ paritapyate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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