वाल्मीकि रामायण 5.38.67
इदं ब्रूयाश्च मे नाथं शूरं रामं पुनः पुनः ।जीवितं धारयिष्यामि मासं दशरथात्मज॥
idaṃ brūyāśca me nāthaṃ śūraṃ rāmaṃ punaḥ punaḥ |jīvitaṃ dhārayiṣyāmi māsaṃ daśarathātmaja ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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