वाल्मीकि रामायण 5.39.20
यदि वा मन्यसे वीर वसैकाहमरिन्दम ।कस्मिंश्चित् संवृते देशे विश्रान्तः श्वो गमिष्यसि॥
yadi vā manyase vīra vasaikāhamarindama |kasmiṃścit saṃvṛte deśe viśrāntaḥ śvo gamiṣyasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें