वाल्मीकि रामायण 5.39.32
तदर्थोपहितं वाक्यं सहितं हेतुसंहितम् ।निशम्य हनुमान् शेषं वाक्यमुत्तरमब्रवीत्॥
tadarthopahitaṃ vākyaṃ sahitaṃ hetusaṃhitam |niśamya hanumān śeṣaṃ vākyamuttaramabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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