वाल्मीकि रामायण 5.39.33
देवि हर्यृक्षसैन्यानामीश्वरः प्लवतां वरः ।सुग्रीवः सत्त्वसम्पन्नस्तवार्थे कृतनिश्चयः॥
devi haryṛkṣasainyānāmīśvaraḥ plavatāṃ varaḥ |sugrīvaḥ sattvasampannastavārthe kṛtaniścayaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें