वाल्मीकि रामायण 5.39.38
मद्विशिष्टाश्च तुल्याश्च सन्ति तत्र वनौकसः ।मत्तः प्रत्यवरः कश्चिन्नास्ति सुग्रीवसन्निधौ॥
madviśiṣṭāśca tulyāśca santi tatra vanaukasaḥ |mattaḥ pratyavaraḥ kaścinnāsti sugrīvasannidhau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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