वाल्मीकि रामायण 5.39.3
स भूयस्त्वं समुत्साहे चोदितो हरिसत्तम ।अस्मिन् कार्यसमारम्भे प्रचिन्तय यदुत्तरम्॥
sa bhūyastvaṃ samutsāhe codito harisattama |asmin kāryasamārambhe pracintaya yaduttaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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