वाल्मीकि रामायण 5.39.42
तौ हि वीरौ नरवरौ सहितौ रामलक्ष्मणौ ।आगम्य नगरीं लङ्कां सायकैर्विधमिष्यतः॥
tau hi vīrau naravarau sahitau rāmalakṣmaṇau |āgamya nagarīṃ laṅkāṃ sāyakairvidhamiṣyataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें