वाल्मीकि रामायण 5.39.45
निहते राक्षसेन्द्रे ऽस्मिन् सपुत्रामात्यबान्धवे ।त्वं समेष्यसि रामेण शशाङ्केनेव रोहिणी॥
nihate rākṣasendre 'smin saputrāmātyabāndhave |tvaṃ sameṣyasi rāmeṇa śaśāṅkeneva rohiṇī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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