वाल्मीकि रामायण 5.39.5
स तथेति प्रतिज्ञाय मारुतिर्भीमविक्रमः ।शिरसा ऽ ऽवन्द्य वैदेहीं गमनायोपचक्रमे॥
sa tatheti pratijñāya mārutirbhīmavikramaḥ |śirasā ' 'vandya vaidehīṃ gamanāyopacakrame ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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