वाल्मीकि रामायण 5.40.12
वैदेह्या वचनं श्रुत्वा करुणं साश्रुभाषितम् ।तथा ऽब्रवीन्महातेजा हनुमान् मारुतात्मजः॥
vaidehyā vacanaṃ śrutvā karuṇaṃ sāśrubhāṣitam |tathā 'bravīnmahātejā hanumān mārutātmajaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें