वाल्मीकि रामायण 5.40.3
यथा तं पुरुषव्याघ्रं गात्रैः शोकाभिकर्शितैः ।संस्पृशेयं सकामा ऽहं तथा कुरु दयां मयि॥
yathā taṃ puruṣavyāghraṃ gātraiḥ śokābhikarśitaiḥ |saṃspṛśeyaṃ sakāmā 'haṃ tathā kuru dayāṃ mayi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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