वाल्मीकि रामायण 5.40.5
मनःशिलायास्तिलको गण्डपार्श्वे निवेशितः ।त्वया प्रनष्टे तिलके तं किल स्मर्तुमर्हसि॥
manaḥśilāyāstilako gaṇḍapārśve niveśitaḥ |tvayā pranaṣṭe tilake taṃ kila smartumarhasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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