वाल्मीकि रामायण 5.46.17
ततस्तं ददृशुर्वीरा दीप्यमानं महाकपिम् ।रश्मिमन्तमिवोद्यन्तं स्वतेजोरश्मिमालिनम्॥
tatastaṃ dadṛśurvīrā dīpyamānaṃ mahākapim |raśmimantamivodyantaṃ svatejoraśmimālinam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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