वाल्मीकि रामायण 5.46.2
स विरूपाक्षयूपाक्षौ दुर्धरं चैव राक्षसम् ।प्रघसं भारकर्णं च पञ्च सेनाग्रनायकान्॥
sa virūpākṣayūpākṣau durdharaṃ caiva rākṣasam |praghasaṃ bhārakarṇaṃ ca pañca senāgranāyakān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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